उत्तराखंड के पेंशनर घर बैठे जमा कर सकेंगे जीवन प्रमाणपत्र, 30 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान

चमोली के कोषागारों में पेंशनरों को डिजिटल प्रमाणपत्र बनाने का प्रशिक्षण और सहायता दी जा रही है। मोबाइल से चेहरे की पहचान कर प्रमाणपत्र बनाने की सुविधा बुजुर्गों और दूरदराज के लोगों के लिए उपयोगी होगी।
Elderly Uttarakhand pensioner using a smartphone at home for Digital Life Certificate face authentication during the November 2026 campaign.

देहरादून, 3 नवंबर। उत्तराखंड के पेंशनरों को अब जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए बैंक या सरकारी पेंशन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं है। पेंशनर मोबाइल ऐप की मदद से घर बैठे अपना डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बना सकते हैं। इस सुविधा की जानकारी देने और पेंशनरों की सहायता के लिए एक से 30 नवंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चमोली जिले में भी इस अभियान के तहत पेंशनरों को ऑनलाइन प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

चमोली के मुख्य कोषाधिकारी राजीव कांत ने बताया कि निदेशालय, कोषागार, पेंशन एवं हकदारी उत्तराखंड के निर्देश पर जिले में पांचवां राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पेंशनरों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ना और जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

अभियान के तहत चमोली जिले के कोषागार और उपकोषागारों में पेंशनरों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाने और ऑनलाइन जमा करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिन लोगों को मोबाइल ऐप चलाने या ऑनलाइन जानकारी भरने में परेशानी होती है, वे इन कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों की सहायता ले सकते हैं।

जीवन प्रमाणपत्र एक ऐसा दस्तावेज है, जिसके माध्यम से पेंशनर अपने जीवित होने की पुष्टि करते हैं। पेंशन जारी रखने के लिए इसे निर्धारित समय पर जमा करना होता है। डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा से यह प्रक्रिया घर बैठे पूरी की जा सकती है। इससे विशेष रूप से बुजुर्ग और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनरों को सुविधा मिलेगी।

पेंशनर घर बैठे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाने के लिए मोबाइल में ‘जीवन प्रमाण’ और ‘आधार फेस आरडी’ ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इसके बाद आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पेंशन भुगतान आदेश (PPO) नंबर और बैंक खाते की जानकारी दर्ज करनी होगी। मोबाइल कैमरे से चेहरे की पहचान सफल होने पर डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र तैयार हो जाएगा। पेंशनर को मोबाइल पर प्रमाणपत्र की पहचान संख्या मिलेगी, जिसकी मदद से वह आधिकारिक वेबसाइट jeevanpramaan.gov.in से प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकेगा।

यह अभियान केंद्र सरकार के पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की ओर से देशभर में चलाया जा रहा है। एक से 30 नवंबर 2026 तक करीब 2,000 शहरों और जिलों में पेंशनरों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभियान के तहत देशभर में 2.30 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें 1.50 करोड़ प्रमाणपत्र चेहरे की पहचान वाली तकनीक से तैयार करने का लक्ष्य है।

राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान में बैंक, डाकघर और पेंशनर कल्याण संगठन भी सहयोग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पेंशनरों तक डिजिटल प्रमाणपत्र की सुविधा पहुंचाना है, ताकि उन्हें बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत न पड़े।

चमोली के मुख्य कोषाधिकारी राजीव कांत ने पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों से अभियान का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन्हें ऑनलाइन प्रमाणपत्र बनाने में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कोषागार या उपकोषागार में जाकर प्रशिक्षण और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

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