स्कूली शिक्षा के Performance Grading Index (PGI-D) में अल्मोड़ा छठे स्थान पर, 327 अंक हासिल

यह ग्रेडिंग केवल परीक्षा परिणामों पर आधारित नहीं होती, बल्कि जिले की पूरी विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करती है। कक्षा शिक्षण, आधारभूत सुविधाएं, डिजिटल शिक्षा, बाल सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे कई मानकों पर प्रदर्शन के आधार पर अंतिम ग्रेड तय किया जाता है। समझिए इस मूल्यांकन का छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या महत्व है।
A composite image showing classroom teaching, student learning and school infrastructure representing the Performance Grading Index (PGI-D) assessment in Almora.

अल्मोड़ा, 13 जुलाई। शिक्षा मंत्रालय की विद्यालयी शिक्षा से जुड़ी ग्रेडिंग में अल्मोड़ा जिले को 327 अंक मिले हैं। इस प्रदर्शन के साथ जिले ने उत्तराखंड में छठा स्थान हासिल किया है और उसे ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में रखा गया है।

यह ग्रेडिंग किसी एक विद्यालय या केवल बोर्ड परीक्षा के परिणाम पर आधारित नहीं है। इसमें जिले की पूरी विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था का समेकित आकलन किया जाता है। इसके तहत यह देखा जाता है कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता कैसी है, विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और प्रशासनिक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से संचालित हो रही है।

मूल्यांकन में प्रभावी कक्षा शिक्षण को प्रमुख आधार बनाया गया। इसके साथ ही स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, विद्यार्थियों से जुड़े अधिकारों और उपलब्ध सेवाओं, विद्यालय सुरक्षा, बाल संरक्षण, डिजिटल शिक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का भी आकलन किया गया। इन सभी क्षेत्रों में मिले अंकों को जोड़कर जिले की अंतिम स्थिति तय की गई।

अल्मोड़ा को कुल 327 अंक मिलने का अर्थ है कि जिले ने कई निर्धारित मानकों पर संतोषजनक प्रदर्शन किया है, लेकिन बेहतर श्रेणी और ऊंची रैंकिंग के लिए अभी सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। राज्य में छठा स्थान मिलने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जिले ने किन क्षेत्रों में बेहतर अंक हासिल किए और किन मानकों पर अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन रहा।

ग्रेडिंग में विद्यालयों की भौतिक स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें कक्षाओं, पेयजल, शौचालय, बिजली, डिजिटल संसाधनों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति देखी जाती है। इसके अलावा स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया।

डिजिटल शिक्षा को शामिल किए जाने से यह भी आंका जाता है कि विद्यालय तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था का कितना उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, जिले के अलग-अलग विद्यालयों की व्यक्तिगत रैंक या मानकवार अंक अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं।

प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े मूल्यांकन में शिक्षा व्यवस्था के संचालन, रिकॉर्ड, निगरानी और विभागीय समन्वय जैसे पहलुओं को देखा जाता है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि जिले में स्कूलों तक योजनाओं और संसाधनों का लाभ किस स्तर तक पहुंच रहा है।

‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी मिलने से अल्मोड़ा की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति सामने आई है। यह ग्रेड जिले के लिए उपलब्धि के साथ सुधार का आधार भी बन सकता है। आगे जिले की रैंकिंग इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षा विभाग और विद्यालय निर्धारित मानकों पर कितना सुधार दर्ज करते हैं।

अभी मानकवार विस्तृत अंक और राज्य के सभी जिलों की पूरी रैंकिंग सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। विस्तृत विवरण सामने आने के बाद यह पता चल सकेगा कि अल्मोड़ा किन क्षेत्रों में आगे रहा और किन हिस्सों में विशेष सुधार की जरूरत है।

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