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नंदा देवी राजजात यात्रा के दौरान हिमालयी पड़ाव पर श्रद्धालु और डोली

नंदा देवी राजजात: 280 किलोमीटर की वह यात्रा जहाँ देवी को बेटी मानकर विदा किया जाता है, लेकिन क्यों?

नंदा देवी राजजात उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। परंपरागत रूप से यह यात्रा लगभग 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित होती है और चमोली जिले के नौटी गाँव से आरंभ होकर लगभग 280 किलोमीटर लंबे मार्ग से होमकुंड तक पहुँचती है। लोकपरंपरा में इसे नंदा देवी की अपने मायके से कैलाश स्थित ससुराल की प्रतीकात्मक यात्रा माना जाता है। यात्रा के प्रमुख पड़ावों में कुलसारी, वाण, बेदनी बुग्याल, रूपकुंड और होमकुंड शामिल हैं। चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) इस यात्रा की सबसे विशिष्ट परंपराओं में से एक है, जबकि लाटू देवता को नंदा देवी का धर्मभाई और यात्रा का रक्षक माना जाता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ राजजात उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकस्मृति और हिमालयी सामाजिक परंपराओं का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

हिमालयी क्षेत्र में भोजपत्र वृक्ष की छाल और पारंपरिक लेखन सामग्री

भोजपत्र: जिस पर कभी लिखे जाते थे शास्त्र, मंत्र और ग्रंथ

क्या सच में कभी किताबों और कागज़ की जगह पेड़ की छाल पर लिखा जाता था? हिमालय में उगने वाला भोजपत्र आखिर इतना खास क्यों था कि उस पर शास्त्र, मंत्र और ग्रंथ लिखे जाते थे — और क्या इसके निशान आज भी उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलते हैं?

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित रहस्यमयी रूपकुंड झील

रूपकुंड: आखिर सैकड़ों कंकाल इस हिमालयी झील तक पहुँचे कैसे?

क्या रूपकुंड में मिले सैकड़ों कंकाल किसी एक हादसे का हिस्सा थे, या इस झील की कहानी उससे कहीं ज्यादा रहस्यमयी है? आखिर अलग-अलग समय और जगहों से जुड़े लोग हिमालय की इस दुर्गम झील तक पहुँचे कैसे — और क्या विज्ञान को इसका पूरा जवाब मिल पाया है?

पहाड़ों में बदलती राहें के बीच उत्तराखंड के एक गांव में पारंपरिक घरों के बीच बना होमस्टे और बदलता ग्रामीण जीवन

पहाड़ों में बदलती राहें: पलायन से संभावना तक

क्या आप जानते हैं, पहाड़ों की कहानी अब सिर्फ पलायन तक सीमित नहीं रही? ये लेख उन छोटे-छोटे बदलावों के बारे में है, जहाँ होमस्टे, खेती, इंटरनेट और नए प्रयोग कई गांवों में रुकने और लौटने की संभावना फिर से पैदा कर रहे हैं।

गाँव से शहर उत्तराखंड के पहाड़ों में खाली होते घर

ऊपर चमकते हिमखंड, नीचे बहती ज़िंदगी

क्यों कुछ घर अब कम खुलते हैं, त्योहारों में आँगन पहले जैसे क्यों नहीं भरते और पहाड़ लौटने की इच्छा अक्सर सिर्फ एक उम्मीद बनकर क्यों रह जाती है – यह लेख पहाड़ से दूर होते जीवन, खाली होते घरों और उस रिश्ते के बारे में है जो दूर जाने के बाद भी पूरी तरह नहीं छूटता।

बंजर होते खेत उत्तराखंड के खाली पड़ते सीढ़ीदार खेत

बंजर होते खेत: खेती क्यों छूट रही है

क्या आप जानते हैं, पहाड़ों में हरे-भरे दिखने वाले कई खेत अब खाली क्यों पड़ने लगे हैं? ये लेख पलायन, बदलते मौसम और खेती से टूटते रिश्ते के पीछे छिपे उस बदलाव के बारे में है, जो धीरे-धीरे पूरे पहाड़ी जीवन को बदल रहा है।

उत्तराखंड में भाऱा घास लेकर लौटती महिलाओं और पहाड़ के रोज़मर्रा श्रम को दर्शाती वास्तविक दृश्य संरचना

एक भाऱा घास: माँ की पीठ पर देखा हुआ पहाड़

पहाड़ की जिंदगी में कई जिम्मेदारियाँ ऐसी थीं, जिन्हें कभी काम के नजरिये से देखा ही नहीं गया। यह लेख उन पहाड़ी महिलाओं के जीवन, मेहनत और यादों को दर्ज करता है, जिनका योगदान अक्सर सामान्य मान लिया जाता था।

पहाड़ी गांव में बातचीत के दौरान संदेश साझा करते ग्रामीणों को दर्शाती रैबार प्रणाली आधारित दृश्य संरचना

रैबार : पहाड़ में चिट्ठी और फोन से पहले का संचार तंत्र

पहाड़ की जिंदगी में खबरें हमेशा सीधे नहीं पहुँचती थीं। यह लेख उस समय की व्यवस्था को याद करता है, जब रास्ते, लोग और भरोसा मिलकर एक ऐसे संचार तंत्र का हिस्सा बनते थे, जिसे पहाड़ में “रैबार” कहा जाता था।

सेवानिवृत्ति के अवसर पर सलामी देते CDS जनरल अनिल चौहान

चार दशक की सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए CDS जनरल अनिल चौहान, नई दिल्ली में मिला त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर

देश के दूसरे CDS जनरल अनिल चौहान चार दशक से अधिक की सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए हैं। नई दिल्ली में त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उनकी औपचारिक विदाई हुई, जानिए उनके कार्यकाल के दौरान किन अहम सैन्य बदलावों पर जोर रहा।

हिमालयी बुग्याल में यार्सागुम्बा की तलाश करते स्थानीय लोग

यार्सागुम्बा: आखिर क्यों इसे ‘हिमालय का सोना’ कहा जाता है?

क्या सच में हिमालय में ऐसी चीज मिलती है, जिसकी कीमत सोने जैसी मानी जाती है? यार्सागुम्बा सिर्फ एक दुर्लभ जैविक संरचना नहीं, बल्कि ऊंचे हिमालय में जोखिम, आजीविका और वैश्विक मांग से जुड़ी एक जटिल दुनिया की कहानी भी है।