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पारंपरिक पड़ाव चट्टी में विश्राम करते यात्री और पहाड़ी मार्ग का दृश्य

यात्रियों के लिए विश्राम और सहारे के रूप में विकसित ये पारंपरिक पड़ाव

चारधाम यात्रा के पारंपरिक मार्गों में “चट्टी” नाम के पड़ाव कैसे यात्रियों के विश्राम, सहारे और सामुदायिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बने, जानिए इनका महत्व।

देहरादून की रफ्तार धीमी करती सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक

सड़कों पर रेंगता शहर, क्या ट्रैफिक में फंसकर थम रही है देहरादून की रफ्तार

देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक जाम के कारण, प्रमुख हॉटस्पॉट और इससे शहर की रफ्तार, पर्यावरण और जीवन पर पड़ रहे प्रभाव को समझिए।

उत्तराखंड के चीड़ के जंगल में ढलान पर फैलती आग और धुआँ

जलते जंगलों के बीच खड़ा पहाड़, क्या धुएँ में घुल रही है हमारी पहाड़ी पहचान

जलते जंगलों के बीच खड़ा पहाड़ और धुएँ में घुलती पहाड़ी पहचान उत्तराखंड में वनाग्नि के बढ़ते संकट की ओर संकेत करती है। जानिए इसके कारण, प्रभाव और समाधान।

पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर दिखाता उत्तराखंड के पहाड़ी गांव में खेती, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और होमस्टे गतिविधियाँ

पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर

उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में पर्यटन, जैविक खेती और छोटे स्थानीय उद्यमों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर उभर रहे हैं। जानिए कैसे बदलता दृष्टिकोण, होमस्टे, पारंपरिक अनाज और डिजिटल काम पहाड़ के युवाओं के लिए नई संभावनाएँ खोल रहे हैं।

गढ़वाली फिल्म इंडस्ट्री और कलाकारों का प्रतिनिधित्व करता दृश्य

पहाड़ की आवाज़, परदे की कहानी: गढ़वाली फिल्म इंडस्ट्री

गढ़वाली फिल्म इंडस्ट्री ने सीमित संसाधनों के बावजूद पहाड़ के जीवन, संस्कृति और संघर्षों को परदे पर दिखाने की कोशिश की है। यह सिनेमा आज भी उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

देहरादून के घंटाघर क्षेत्र का सड़क दृश्य

90 के दशक का देहरादून: एक शांत शहर और अपनेपन से भरी ज़िंदगी

90 के दशक का देहरादून एक शांत, धीमी रफ्तार और अपनापन भरा शहर था। उस दौर की गलियाँ, मोहल्ले और रिश्ते आज भी लोगों की यादों में बसे हुए हैं।