चमोली, 19 जुलाई: बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई नकदी और अन्य भेंट में कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं, इस मामले में पहले गिरफ्तार बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को पुलिस रिमांड पर लेने की विशेष जांच दल की मांग अदालत ने खारिज कर दी।
विशेष जांच दल ने राजेंद्र सिंह चौहान को 17 जुलाई को करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। वह बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में मंदिर अधिकारी के पद पर कार्यरत रह चुके हैं और इस मामले में गिरफ्तार होने वाले दूसरे आरोपी हैं।
जांच एजेंसी पुराने सीसीटीवी फुटेज, चढ़ावे की गणना से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी जमा करने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। कुछ फुटेज में चढ़ावे की गणना के दौरान संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया गया है। इन्हीं फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर चौहान से पूछताछ की गई।
इस मामले में पहली गिरफ्तारी प्रमोद नौटियाल की हुई थी। पुलिस ने उनसे पूछताछ और साक्ष्यों की बरामदगी के लिए तीन दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने यह अर्जी स्वीकार नहीं की। रिमांड खारिज होने का तथ्य प्रमोद नौटियाल से जुड़ा है, राजेंद्र चौहान से नहीं।
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मामला सोशल मीडिया पर वीडियो और आरोप सामने आने के बाद चर्चा में आया था। इसके बाद मंदिर समिति और शासन स्तर पर जांच शुरू हुई। प्रारंभिक जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और बाद में मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई।
एसआईटी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित हेराफेरी किसी एक व्यक्ति तक सीमित थी या इसमें अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल थे। जांच टीम चढ़ावे के रिकॉर्ड, बैंक में जमा राशि और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज का आपस में मिलान कर रही है।
कथित हेराफेरी की कुल राशि का अभी आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं और मामले की जांच जारी है।
जांच के दौरान SIT मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े अन्य कर्मचारियों और उस समय ड्यूटी पर मौजूद लोगों से भी पूछताछ कर सकती है। इसके साथ ही यह देखा जा रहा है कि नकदी और अन्य भेंट को गिनने, दर्ज करने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था में कहीं निगरानी या प्रक्रिया संबंधी खामी तो नहीं थी।
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