देहरादून, 19 जुलाई। उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। गढ़वाली फिल्म ढोली’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म चुना गया है। फिल्म को इस श्रेणी में प्रतिष्ठित रजत कमल प्रदान किया जाएगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की आधिकारिक सूची में ‘ढोली’ को यह सम्मान दिया गया है। फिल्म का निर्माण एससी फार्माकेम प्राइवेट लिमिटेड ने किया है, जबकि इसके निर्देशक दिनेश पी. भोंसले हैं।
पुरस्कार के तहत फिल्म के निर्माता और निर्देशक को अलग-अलग रजत कमल के साथ दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर गढ़वाली भाषा की फिल्म को मिले इस सम्मान से उत्तराखंड के कलाकारों और क्षेत्रीय फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों में खुशी है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल हैं। इनमें विभिन्न भारतीय भाषाओं में बनाई गई फिल्मों के साथ अभिनय, निर्देशन, लेखन, संगीत और तकनीकी क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य को सम्मानित किया जाता है।
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‘ढोली’ को सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फिल्म चुना जाना उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाओं में बन रहे सिनेमा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमित संसाधनों और छोटे दर्शक वर्ग के बावजूद गढ़वाली तथा कुमाऊंनी भाषा में फिल्में बनाने वाले कलाकार लंबे समय से स्थानीय कहानियों को पर्दे पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।
इस उपलब्धि से गढ़वाली भाषा में फिल्म निर्माण को नई पहचान मिलने के साथ उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों, कलाकारों और फिल्मकारों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्मों के लिए विशेष श्रेणियां रखी जाती हैं। ‘ढोली’ को मिला यह सम्मान गढ़वाली भाषा की कहानियों और उत्तराखंड की क्षेत्रीय फिल्म प्रतिभाओं को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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