चमोली, 22 जुलाई। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले की जांच अब मंदिर को मिली दान राशि के पूरे रिकॉर्ड तक पहुंच गई है। मंदिर समिति के रिकॉर्ड के आधार पर प्रकाशित जानकारी के अनुसार, कपाट खुलने के बाद 2 जुलाई तक चढ़ावे की 34 बार गणना की गई थी। इस दौरान करीब ₹23 करोड़ की नकदी गिने जाने का रिकॉर्ड है।
एसआईटी अब गणना से जुड़े रिकॉर्ड का मंदिर के खजाने और बैंक में जमा धनराशि से मिलान कर रहा है। जांच में यह देखा जा रहा है कि प्रत्येक गणना के दौरान कितनी नकदी और अन्य सामग्री मिली, उसे दस्तावेजों में कैसे दर्ज किया गया और बाद में कितनी रकम बैंक में जमा कराई गई।
मामले की जांच केवल नकद चढ़ावे तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित सोने-चांदी के आभूषणों, सिक्कों और अन्य बहुमूल्य सामग्री से जुड़े दस्तावेज भी देखे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि रिकॉर्ड में दर्ज चढ़ावे और सुरक्षित रखी गई सामग्री के बीच कोई अंतर तो नहीं है।
चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला 2 जुलाई को सामने आया था। इसके बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने आंतरिक जांच समिति गठित की थी। समिति को गणना कक्ष में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लेने के साथ सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जिम्मेदारी दी गई।
मामला सामने आने के बाद बदरीनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस जांच के लिए एसआईटी बनाया गया। एसआईटी ने 2 जुलाई के अलावा जून की अन्य तारीखों की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली है। फुटेज में दिखाई देने वाली गतिविधियों और गणना कक्ष में मौजूद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
एसआईटी ने मंदिर के सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष, चढ़ावा संभालने की प्रक्रिया और गणना के बाद नकदी को सुरक्षित रखने तथा बैंक तक पहुंचाने की व्यवस्था की भी समीक्षा की है। मंदिर समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं और उपलब्ध दस्तावेजों का आपस में मिलान किया जा रहा है।
मामले में निलंबित बीकेटीसी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान उससे एक शालिग्राम और लैपटॉप बरामद होने की जानकारी सामने आई थी, हालांकि उसके पास से नकदी बरामद नहीं हुई। एसआईटी ने बदरीनाथ धाम के पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को भी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है।
मंदिर समिति की आंतरिक जांच रिपोर्ट भी एसआईटी को सौंपी गई है। पुलिस अब इस रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयानों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि चढ़ावे की कुल कितनी धनराशि में कथित हेराफेरी हुई। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
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