देहरादून, 17 जुलाई। चकराता के प्रसिद्ध मोइला टॉप-बुधेर क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर दो महीने के लिए रोक लगा दी गई है। चकराता वन प्रभाग ने पर्यटकों की सुरक्षा को कारण बताते हुए 15 जुलाई से 15 सितंबर तक क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है।
प्रतिबंध लागू होने के बाद पर्यटकों को मोइला टॉप और बुधेर की ओर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। वन विभाग के आदेश में सुरक्षा को रोक का आधार बताया गया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष दुर्घटना, भूस्खलन या ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने को प्रतिबंध का कारण नहीं बताया गया है।
मोइला टॉप चकराता क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन और ट्रैकिंग स्थलों में शामिल है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटक बुधेर वन विश्राम गृह की ओर से पैदल रास्ता तय करते हैं। देवदार के जंगलों से घिरा यह क्षेत्र खुले घास के मैदानों और बुधेर की गुफाओं के लिए जाना जाता है।
इस फैसले का असर स्थानीय पर्यटन कारोबार पर पड़ने की आशंका है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र के कई ग्रामीण पर्यटकों के लिए वाहन, भोजन, मार्गदर्शन और ठहरने जैसी सेवाओं से जुड़े हैं। दो महीने की रोक के कारण उनकी आमदनी प्रभावित हो सकती है।
यह भी पढ़ें: उत्तराखंड: झड़ीपानी रेलवे भूमि विवाद फिर गरमाया, सात दिन में जवाब देने के निर्देश
रिपोर्ट में प्रतिबंध को लेकर कुछ स्थानीय लोगों की नाराजगी का भी उल्लेख है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटन गतिविधियां बंद होने से क्षेत्र में इससे जुड़े लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा।
मोइला टॉप-बुधेर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा मानी जाती हैं। गर्मियों और मानसून के दौरान यहां पहुंचने वाले पर्यटकों से आसपास के गांवों में वाहन चालकों, छोटे दुकानदारों, होमस्टे संचालकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को काम मिलता है। ऐसे में लंबे समय तक प्रवेश बंद रहने का असर केवल पर्यटकों की यात्रा पर नहीं, बल्कि ग्रामीणों की मौसमी आय पर भी पड़ सकता है।
वन विभाग की ओर से प्रतिबंध 15 सितंबर तक लागू किया गया है। इस अवधि के दौरान पर्यटकों को मोइला टॉप-बुधेर क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। प्रतिबंध समाप्त होने के बाद आगे की व्यवस्था विभाग के आदेश के अनुसार तय होगी।
यह भी पढ़ें: ₹6,252 करोड़ की रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना पर नया सवाल, फिर होगी हाइड्रोलॉजिकल स्टडी




