₹6,252 करोड़ की रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना पर नया सवाल, फिर होगी हाइड्रोलॉजिकल स्टडी

परियोजना की अंतिम मंजूरी अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि नई तकनीकी जांच के निष्कर्षों पर भी निर्भर करेगी। यह अध्ययन बताएगा कि प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर भविष्य में बाढ़ और तेज जलप्रवाह जैसी परिस्थितियों में कितना सुरक्षित रहेगा और क्या इसके डिजाइन, लागत या समयसीमा में किसी बदलाव की जरूरत पड़ेगी।
An elevated multi-lane urban roadway passing through a densely populated city area, illustrating the concept of an elevated transport corridor.

देहरादून, 17 जुलाई। रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना की अंतिम स्वीकृति से पहले अब एक और हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराई जाएगी। लोक निर्माण विभाग के अनुसार परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास है, लेकिन नई तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही इसके अगले चरण पर स्थिति स्पष्ट होगी।

करीब 25.75 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹6,252 करोड़ है। इसे देहरादून के भीतर लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि शहर की व्यस्त सड़कों और प्रमुख चौराहों पर यातायात का दबाव कम किया जा सके।

इससे पहले IIT रुड़की से परियोजना की हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराई जा चुकी है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार की ओर से दिए गए विवरण के अनुसार यह अध्ययन जून 2024 में हुआ था। हालांकि, इसकी पूरी रिपोर्ट और विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

अब लोक निर्माण विभाग ने बताया है कि अंतिम स्वीकृति से पहले एक अतिरिक्त अध्ययन कराया जा रहा है। यह जांच बहादराबाद स्थित सिंचाई अनुसंधान संस्थान से भौतिक पद्धति के आधार पर कराने की तैयारी है।

उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार नई स्टडी में पुराने बारिश और बाढ़ के आंकड़ों का अध्ययन कर यह परखा जाएगा कि प्रस्तावित संरचना तेज बहाव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में कितनी सुरक्षित रहेगी। अध्ययन में करीब 100 वर्षों के बारिश और बाढ़ से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड को आधार बनाए जाने की बात कही गई है।

नई जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रस्तावित सड़क का बड़ा हिस्सा रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्र के ऊपर तैयार होना है। बरसात के दौरान दोनों नदियों में जलस्तर और बहाव तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में सड़क के पिलर और दूसरी संरचनाओं का नदी की जल निकासी तथा बाढ़ सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अंतिम डिजाइन और मंजूरी से पहले स्पष्ट करना जरूरी माना जा रहा है।

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परियोजना को दो हिस्सों में तैयार किया जाना है। रिस्पना नदी के ऊपर विधानसभा क्षेत्र के पास स्थित पुल से नागल पुल तक करीब 10.946 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर प्रस्तावित है। इस हिस्से की अनुमानित लागत ₹2,509 करोड़ है।

बिंदाल नदी के ऊपर कारगी चौक के पास से राजपुर रोड स्थित साईं मंदिर क्षेत्र तक करीब 14.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत ₹3,743 करोड़ बताई गई है।

योजना में केवल सड़क और पिलर का निर्माण शामिल नहीं है। नदी क्षेत्र से गुजर रही बिजली और हाईटेंशन लाइनें, सीवर नेटवर्क तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं को स्थानांतरित करने के साथ रिटेनिंग वॉल और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्य भी प्रस्तावित हैं।

इस कॉरिडोर से कारगी चौक, सहारनपुर रोड, हरिद्वार रोड, राजपुर रोड और शहर के बीच के व्यस्त हिस्सों पर वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, यातायात में कितनी कमी आएगी, इसका अंतिम आकलन निर्माण, प्रवेश-निकास बिंदुओं और परियोजना के संचालन मॉडल पर निर्भर करेगा।

परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। सार्वजनिक सुनवाई और सामाजिक प्रभाव आकलन के दौरान नदी किनारे बसे परिवारों, जमीन, पुनर्वास, मुआवजे और निर्माण के दौरान होने वाली परेशानी से जुड़े मुद्दे सामने आए थे।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी पहले सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया में निर्धारित अवधि का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। बाद में सुनवाई दोबारा आयोजित की गई। परियोजना से प्रभावित जमीन और संरचनाओं की संख्या को लेकर अलग-अलग चरणों में अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए अंतिम प्रभाव का स्पष्ट आकलन भूमि अधिग्रहण और अद्यतन सर्वेक्षण के बाद ही होगा।

फिलहाल परियोजना निर्माण चरण में नहीं पहुंची है। नई हाइड्रोलॉजिकल स्टडी पूरी होने, रिपोर्ट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सामने रखे जाने और जरूरी तकनीकी बदलाव तय होने के बाद ही अंतिम स्वीकृति तथा निर्माण की समयसीमा स्पष्ट होगी।

अभी यह भी तय नहीं है कि अतिरिक्त अध्ययन से परियोजना की लागत या डिजाइन में कोई बदलाव होगा या नहीं। ऐसे में देहरादून के लिए प्रस्तावित इस बड़े यातायात कॉरिडोर की अगली दिशा अब नई तकनीकी रिपोर्ट के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

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