देहरादून-मसूरी रोपवे से प्रभावित पुरकुल के परिवारों के लिए बनेगा वैकल्पिक मार्ग, निर्माण की प्रक्रिया शुरू

बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में अक्सर स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। यह वैकल्पिक मार्ग उसी संतुलन की एक अहम कड़ी माना जा रहा है, लेकिन इसकी समयसीमा, आधिकारिक लागत और वास्तविक लाभ निर्माण आगे बढ़ने के साथ ही स्पष्ट होंगे। क्या है पूरा मामला?
देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना के तहत पुरकुल में वैकल्पिक संपर्क मार्ग के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और अन्य अधिकारी।

देहरादून, 14 जुलाई। देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना के निचले टर्मिनल के ऊपर बसे पुरकुल गांव के परिवारों के लिए वैकल्पिक संपर्क मार्ग बनाया जाएगा। लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य रोपवे क्षेत्र के ऊपर स्थित आवासीय इकाइयों की आवाजाही के लिए अलग रास्ता उपलब्ध कराना है।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मार्ग निर्माण का शिलान्यास किया। रिपोर्ट में इसकी लागत करीब ₹1.31 करोड़ और लंबाई लगभग डेढ़ किलोमीटर बताई गई है। हालांकि इन दोनों आंकड़ों का विस्तृत आधिकारिक विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध निविदा जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

पुरकुल में देहरादून-मसूरी रोपवे का निचला टर्मिनल बनाया जा रहा है। परियोजना का दूसरा छोर मसूरी के लाइब्रेरी या गांधी चौक क्षेत्र के पास प्रस्तावित है। रोपवे की लंबाई करीब 5.5 किलोमीटर बताई गई है।

परियोजना के तहत पुरकुल में टर्मिनल, पार्किंग और यात्रियों से जुड़ी अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। टर्मिनल के ऊपर बसे परिवारों के लिए अलग मार्ग बनने से उनकी स्थानीय आवाजाही रोपवे परिसर की गतिविधियों से अलग हो सकेगी।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नया मार्ग कितने परिवारों को सीधे लाभ देगा और निर्माण कब तक पूरा होगा। निविदा प्रक्रिया और विभागीय कार्ययोजना के आधार पर इसकी समयसीमा तय की जाएगी।

रोपवे निर्माण के कारण पुराना रास्ता पूरी तरह बंद या क्षतिग्रस्त हुआ है, इसकी स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। हालांकि वैकल्पिक मार्ग की जरूरत से यह साफ है कि टर्मिनल के ऊपर स्थित बस्तियों के लिए अलग संपर्क व्यवस्था आवश्यक मानी गई है।

मार्ग तैयार होने के बाद स्थानीय लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है। इससे रोपवे परियोजना के निर्माण और भविष्य में संचालन के दौरान आवासीय क्षेत्रों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।

देहरादून-मसूरी रोपवे को पर्यटन और यातायात दबाव कम करने वाली परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में यात्रा का संभावित समय 15 से 20 मिनट बताया गया है, लेकिन अंतिम परिचालन समय परियोजना शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब नजर वैकल्पिक मार्ग के निर्माण की वास्तविक प्रगति, लागत की आधिकारिक पुष्टि और इसे आवागमन के लिए खोले जाने की समयसीमा पर रहेगी।

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