देहरादून में सीलबंद Panacea Hospital में 15 दिन में दो बार चोरी, नेहरू कॉलोनी थाने में केस दर्ज

सीलबंद अस्पताल में लगातार दूसरी बार हुई चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था और सील किए गए परिसरों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब आरोपियों की पहचान, चोरी हुए सामान और पूरी घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में अब तक क्या सामने आया है, पूरी रिपोर्ट पढ़िए।
Front view of Panacea Hospital building located near Rispana Bridge in Dehradun.

देहरादून। रिस्पना पुल के पास स्थित सीलबंद पैनेसिया अस्पताल में 15 दिन के भीतर दो बार चोरी की घटना सामने आई है। प्रशासन की सील के बावजूद अस्पताल को अज्ञात चोरों ने दो बार निशाना बनाया। मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से नेहरू कॉलोनी थाने में तहरीर दी गई, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अस्पताल में बीते 20 मई को एसी में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इस घटना के बाद 22 मई को जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था। अस्पताल सील होने के कारण प्रबंधन का कहना है कि अंदर रखे सामान की पूरी जांच अभी संभव नहीं हो पा रही है।

अस्पताल प्रबंधक रणबीर सिंह चौहान और निदेशक शुभम चंदेल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि पहली घटना 20 जून की रात हुई। उस दौरान पड़ोसियों ने रात में तोड़फोड़ की आवाजें सुनीं। अगले दिन जांच करने पर अस्पताल के पीछे झाड़ियों वाले प्लॉट में गद्दे और अन्य उपकरण बिखरे मिले। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई।

इसके बाद तीन जुलाई की रात करीब एक से दो बजे के बीच अस्पताल को फिर निशाना बनाया गया। इस दौरान वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड विनोद भंडारी ने चोरों को सामान लेकर भागते देखा और उनका पीछा भी किया, लेकिन आरोपी हाथ नहीं आए।

घटना की जानकारी कर्मचारी नवीन ध्यानी ने पुलिस को दी। सूचना मिलने पर चीता पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सील होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन फिलहाल नहीं हो पाया है।

मामले में नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसओ नेहरू कॉलोनी मनोज नौटियाल के अनुसार, तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है और घटना की जांच की जा रही है।

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सीलबंद अस्पताल में चोरी करने वाले आरोपी कौन थे और अंदर से कौन-कौन सा सामान ले जाया गया। अस्पताल सील होने के कारण नुकसान की पूरी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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