दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों की आवाजाही प्रतिबंधित, वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करेगा प्रशासन

कांवड़ यात्रा के दौरान यह व्यवस्था तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे पर पैदल श्रद्धालुओं और वाहनों के बीच संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए लागू की जा रही है। प्रशासन वैकल्पिक मार्गों, प्रवेश नियंत्रण और राज्यों के बीच समन्वित यातायात प्रबंधन के जरिए यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने की तैयारी कर रहा है।
A split image showing the Delhi-Dehradun Expressway alongside Kanwar pilgrims walking during the annual pilgrimage, illustrating traffic management measures.

देहरादून, 18 जुलाई। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ यात्रियों को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हरिद्वार में हुई अंतरराज्यीय समन्वय बैठक में इस संबंध में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को पहले से जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह बैठक मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई। इसमें उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि कांवड़ यात्रियों को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर प्रवेश न मिले। इसके लिए एक्सप्रेसवे से जुड़े प्रवेश बिंदुओं और आसपास के मार्गों पर समय रहते जरूरी यातायात प्रबंधन करने को कहा गया है।

बैठक में यात्रियों की पहचान, प्रतिबंधित सामान की रोकथाम, आपदा प्रबंधन और संवेदनशील सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर भी जोर दिया गया। संबंधित राज्यों से कहा गया कि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में आपसी समन्वय से तुरंत कार्रवाई की जाए।

कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है। इस दौरान हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन यातायात, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि यात्रा के दौरान यातायात से जुड़ी सूचनाएं समय-समय पर जारी की जाएंगी। वाहन चालकों और यात्रियों से प्रशासन की आधिकारिक सलाह के अनुसार ही मार्ग चुनने की अपील की गई है।

प्रशासन का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रियों का प्रवेश रोकने का उद्देश्य तेज रफ्तार वाहनों और पैदल श्रद्धालुओं के बीच संभावित हादसों का खतरा कम करना है। संबंधित जिलों की पुलिस और यातायात इकाइयों को यात्रा शुरू होने से पहले प्रवेश बिंदुओं पर स्पष्ट संकेतक लगाने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड: झड़ीपानी रेलवे भूमि विवाद फिर गरमाया, सात दिन में जवाब देने के निर्देश

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड: झड़ीपानी रेलवे भूमि विवाद फिर गरमाया, सात दिन में जवाब देने के निर्देश