हल्द्वानी में नए हाईकोर्ट परिसर की प्रक्रिया आगे बढ़ी, 40 हेक्टेयर भूमि की जरूरत

हल्द्वानी में प्रस्तावित नए हाईकोर्ट परिसर को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। भूमि हस्तांतरण, वैधानिक मंजूरियों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजना के निर्माण की दिशा तय होगी। आगे पढ़िए...
The historic Uttarakhand High Court building in Nainital surrounded by deodar trees.

हल्द्वानी। उत्तराखंड हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हल्द्वानी क्षेत्र में चिह्नित भूमि छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट को सौंपने का निर्देश दिया है।

अदालत के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने नए परिसर के लिए करीब 40 हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई है। राज्य सरकार को भूमि हस्तांतरण के साथ सभी जरूरी वैधानिक मंजूरियां लेने और आसपास के हरित क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

नैनीताल जिला प्रशासन ने मई 2026 में हल्द्वानी क्षेत्र में तीन भूखंडों का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें लामाचौड़ क्षेत्र में बेलबाबा मंदिर के पास की भूमि भी शामिल है। हालांकि, सटीक स्थल और अंतिम भूमि चयन से जुड़ा विस्तृत सरकारी आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट वर्तमान में नैनीताल के ऐतिहासिक भवन से संचालित हो रहा है। हाईकोर्ट की मौजूदा स्वीकृत न्यायाधीश क्षमता 11 है। मामलों की बढ़ती संख्या और सीमित स्थान के कारण लंबे समय से बड़े और आधुनिक न्यायिक परिसर की जरूरत महसूस की जा रही है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार, नए परिसर को 30 जजों की क्षमता के अनुरूप विकसित करने की तैयारी का दावा किया गया है। हालांकि, 30 जजों की क्षमता वाला कोई अंतिम स्वीकृत मास्टर प्लान अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए इसे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रस्तावित क्षमता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

नए परिसर में आधुनिक अदालत कक्ष, डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था, अधिवक्ताओं के चैंबर, पार्किंग, प्रशासनिक भवन और आवासीय सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना बताई गई है। इन सुविधाओं की अंतिम सूची और निर्माण का स्वरूप विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा प्रशासनिक मंजूरी के बाद तय होगा।

हाईकोर्ट के स्थानांतरण का प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल के सामने भी रखा जाना है। फिलहाल कैबिनेट से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और परियोजना का निर्माण शुरू होने में भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरण स्वीकृतियों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।

नया परिसर बनने से वादकारियों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय कारोबार, परिवहन और आवासीय मांग पर इसके संभावित प्रभाव का वास्तविक आकलन परिसर के निर्माण और संचालन के बाद ही किया जा सकेगा।

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