देहरादून: शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की वयस्क साक्षरता दर 98 प्रतिशत पहुंचने के बाद उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने से जुड़े प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड को देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बताया जा रहा है।
केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 95 प्रतिशत या उससे अधिक साक्षरता दर हासिल करने पर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण साक्षर माना जाता है। उत्तराखंड ने 98 प्रतिशत वयस्क साक्षरता दर के साथ इस मानक को पार कर लिया है।
राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इससे जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। लद्दाख पूर्ण साक्षर घोषित होने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए गर्व का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
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उत्तराखंड में साक्षरता दर राज्य गठन के बाद लगातार बढ़ी है। वर्ष 2001 की जनगणना में राज्य की साक्षरता दर 71.6 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 78.8 प्रतिशत हो गई थी। इसके बाद वयस्क शिक्षा और साक्षरता अभियानों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों, महिलाओं और कमजोर वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर दिया गया।
उल्लास कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के निरक्षर लोगों को बुनियादी पढ़ाई, लिखाई और सामान्य गणना से जोड़ने का काम किया गया।। इसमें शिक्षकों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम रही।
उत्तराखंड की यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की प्रगति को दिखाती है। अब चुनौती यह होगी कि साक्षरता को केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित न रखकर डिजिटल, वित्तीय और जीवन कौशल से भी जोड़ा जाए।
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