हरेला पर उत्तराखंड में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, 7,817 ग्राम पंचायतों और 15,906 गांवों की होगी भागीदारी

हरेला पर इस बार पूरे उत्तराखंड में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें हजारों ग्राम पंचायतों और गांवों की भागीदारी होगी। अभियान का फोकस केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और जनभागीदारी को मजबूत करना भी है। जानिए इस बार अभियान की क्या है पूरी योजना।
Villagers, Gram Panchayat representatives, Forest Department staff and volunteers planting native saplings during the Harela plantation campaign in Uttarakhand.

देहरादून, 12 जुलाई। उत्तराखंड में 16 जुलाई से हरेला पौधारोपण अभियान शुरू होगा। राज्यभर में इस अभियान के तहत 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें वन विभाग 59 लाख और उद्यान विभाग 11 लाख पौधों की व्यवस्था करेगा।

अभियान में प्रदेश की 7,817 ग्राम पंचायतों और उनके अंतर्गत आने वाले 15,906 गांवों को जोड़ा जाएगा। ग्राम पंचायतों को केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी से भी जोड़ने की तैयारी है।

अभियान करीब 15 दिनों तक चलेगा। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। स्थानीय स्तर पर लोगों को पौधों के संरक्षण से जोड़कर अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप देने की योजना है।

पौधारोपण के लिए स्थानीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल प्रजातियों के चयन पर जोर दिया जाएगा। वन और उद्यान विभाग के सहयोग से ग्राम पंचायतों और गांवों तक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

उत्तराखंड में हरेला प्रकृति, खेती और हरियाली से जुड़ा पारंपरिक लोकपर्व है। इस अवसर पर पौधारोपण की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। सरकार इस अभियान के जरिए इस परंपरा को गांवों की सक्रिय भागीदारी और पौधों की नियमित देखभाल से जोड़ने की तैयारी कर रही है।

अभियान की सफलता का दारोमदार केवल लगाए जाने वाले पौधों की संख्या पर नहीं, बल्कि उनके संरक्षण पर भी रहेगा। इसलिए ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की भूमिका को इस बार अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।

पौधारोपण के लिए गांवों में उपलब्ध सार्वजनिक भूमि, पंचायत क्षेत्र, जलस्रोतों के आसपास और अन्य उपयुक्त स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय भागीदारी से ऐसे स्थानों पर पौधे लगाने का प्रयास होगा, जहां उनकी नियमित निगरानी और देखभाल आसानी से की जा सके।

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