ऋषिकेश, 12 जुलाई। ऋषिकेश क्षेत्र में प्रस्तावित चार लेन बाइपास परियोजना के लिए हजारों पेड़ों के संभावित कटान का विरोध तेज हो गया है। स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता शिवालिक हाथी रिजर्व क्षेत्र में पेड़ों के पास मौजूद रहकर उनकी निगरानी कर रहे हैं और परियोजना से वन क्षेत्र को होने वाले नुकसान पर चिंता जता रहे हैं।
एएनआई द्वारा साझा किए गए वीडियो में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता पेड़ों के पास एकत्र दिखाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सड़क परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीर आकलन किया जाना चाहिए और ऐसे विकल्प तलाशे जाने चाहिए, जिनसे वन क्षेत्र को कम से कम नुकसान पहुंचे।
ऋषिकेश बाइपास की प्रस्तावित चार लेन परियोजना के तहत शिवालिक हाथी रिजर्व क्षेत्र में करीब 3,995 पेड़ों के कटान का प्रस्ताव है। इसी प्रस्ताव के विरोध में स्थानीय लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं और पेड़ों की सुरक्षा के लिए मौके पर निगरानी भी कर रहे हैं।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि बेहतर सड़क और यातायात सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनका मानना है कि परियोजना के डिजाइन में ऐसे विकल्पों पर विचार होना चाहिए, जिनसे पेड़ों की कटाई न्यूनतम रहे और वन क्षेत्र पर कम से कम प्रभाव पड़े।
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शिवालिक हाथी रिजर्व उत्तराखंड के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है, जहां हाथियों समेत कई वन्यजीवों की आवाजाही होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रस्तावित कटान को लेकर स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विरोध केवल पेड़ों को बचाने का नहीं, बल्कि पूरे वन क्षेत्र और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने का प्रयास है। उनका तर्क है कि किसी भी बड़े सड़क प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले वैकल्पिक मार्ग, कम कटान वाले डिजाइन और विस्तृत पर्यावरणीय आकलन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
फिलहाल परियोजना के तहत पेड़ों के अंतिम कटान, वैकल्पिक उपायों और आगे की प्रक्रिया को लेकर संबंधित विभागों की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना पर आगे का निर्णय लिया जाए।
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