उत्तराखंड में NEP(National Education policy) के तहत नई व्यवस्था, स्कूलों में 220 और कॉलेजों में 180 दिन पढ़ाई

अगर आपके घर में स्कूल या कॉलेज में पढ़ने वाला छात्र है, तो यह बदलाव उसके पूरे शैक्षणिक सत्र को प्रभावित कर सकता है। नई व्यवस्था के तहत पढ़ाई, शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थानों के वार्षिक कैलेंडर में क्या बदलाव होंगे, आगे पढ़िए...
Education Minister Dr. Dhan Singh Rawat chairs a review meeting on NEP implementation with senior education department officials in Dehradun.

देहरादून, 21 जुलाई। उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्कूलों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में निर्धारित शिक्षण दिवस पूरे कराने पर जोर दिया गया है। विद्यालयों में 220 और उच्च शिक्षण संस्थानों में कम से कम 180 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों से कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर इस तरह तैयार किया जाए, जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो और तय समय के भीतर पाठ्यक्रम पूरा कराया जा सके।

विद्यालयों में 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षा अधिकारियों और संस्थान प्रमुखों की होगी। इसी तरह विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को कम से कम 180 शिक्षण दिवस पूरे करने होंगे।

शिक्षण दिवस का अर्थ केवल सामान्य कक्षाओं से नहीं है। इसमें शैक्षणिक गतिविधियां, प्रयोगात्मक कार्य, मूल्यांकन और पाठ्यक्रम से जुड़ी दूसरी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं। इसलिए संस्थानों को छुट्टियों, परीक्षाओं और अन्य कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए अपना शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करना होगा।

समीक्षा बैठक में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी पर भी जोर दिया गया। बायोमेट्रिक उपस्थिति से जुड़ी व्यवस्था को प्रभावी बनाने की बात कही गई है, हालांकि इससे संबंधित विस्तृत शासनादेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को कौशल आधारित और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। उच्च शिक्षण संस्थानों से शोध, नवाचार और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार करने को कहा गया है।

उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पहले से लागू है। मौजूदा निर्देश नीति को पहली बार लागू करने से जुड़े नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन और नियमित निगरानी से संबंधित हैं।

फिलहाल 180 और 220 शिक्षण दिवसों से जुड़ा विस्तृत विभागीय आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन्हें समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इनके पालन की वास्तविक स्थिति संबंधित संस्थानों के शैक्षणिक कैलेंडर और विभागीय निगरानी से स्पष्ट होगी।

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