उत्तराखंड में पिछले डेढ़ दशक में आबादी, परिवारों और मकानों की संख्या में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। भवन गणना के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य की जनसंख्या अब 1.27 करोड़ के पार पहुंच गई है।
वर्ष 2011 की जनगणना में उत्तराखंड की आबादी करीब 1.01 करोड़ थी। अब यह बढ़कर 1.27 करोड़ से अधिक हो गई है। यानी करीब 15 वर्षों में राज्य की जनसंख्या में लगभग 26% की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसी अवधि में परिवारों और मकानों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। राज्य में परिवारों की संख्या करीब 20 लाख से बढ़कर 28.3 लाख हो गई है। वहीं मकानों की संख्या लगभग 33.8 लाख से बढ़कर 45 लाख तक पहुंच गई है।
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में शहरीकरण, नए आवासीय क्षेत्रों और रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी आई है। परिवारों की संख्या में हुई बढ़ोतरी को एकल परिवारों के बढ़ते चलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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इसी बीच उत्तराखंड में Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देहरादून में अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी समीक्षा की।
बैठक में बताया गया कि इस अभियान का उद्देश्य वोटर लिस्ट को और अधिक सटीक बनाना है। इसके तहत मृत, अनुपस्थित, शिफ्ट हो चुके, दो जगह नाम दर्ज होने वाले और विदेशी मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जाएगा।
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि प्री-SIR फेज में अब तक करीब 89% मैपिंग पूरी हो चुकी है। गणना प्रपत्रों की प्रिंटिंग की तैयारी भी चल रही है।
उन्होंने बताया कि DEO, Deputy DEO और ERO अधिकारियों की पहले चरण की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। BLO और अन्य फील्ड स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मतदाताओं से BLO को सहयोग देने और अपना नया फोटो उपलब्ध कराने की अपील की है। साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारियों और ERO को राजनीतिक दलों के साथ हर सप्ताह बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन भी मौजूद रहे।
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