फीफा(FIFA) वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की रहेगी चर्चा

फीफा(FIFA) वर्ल्ड कप 2026 में भारत की टीम भले मैदान पर नहीं होगी, लेकिन क्या इस बार भारतीय कनेक्शन फिर भी चर्चा में रहेगा? अलग-अलग देशों की टीमों से जुड़े भारतीय मूल के खिलाड़ी भारतीय फुटबॉल फैंस के लिए इस वर्ल्ड कप को थोड़ा खास बना सकते हैं।
फीफा(FIFA) वर्ल्ड कप 2026 और भारत के फुटबॉल कनेक्शन को दर्शाती प्रतिनिधि छवि

फीफा(FIFA) वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय फुटबॉल टीम भले ही हिस्सा नहीं ले रही हो, लेकिन इस बार टूर्नामेंट में भारतीय कनेक्शन जरूर देखने को मिल सकता है। अलग-अलग देशों की टीमों से जुड़े भारतीय मूल के 4 फुटबॉलरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 11 जून 2026 से होगी और फाइनल 19 जुलाई 2026 को खेला जाएगा। इस बार टूर्नामेंट ‘अमेरिका’, ‘कनाडा’ और ‘मैक्सिको’ की संयुक्त मेजबानी में होगा। पहली बार फीफा वर्ल्ड कप में 48 टीमें हिस्सा लेंगी।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय मूल के इन खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए इसे भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए खास पल बताया है। उन्होंने लिखा कि भारतीय फुटबॉलर अभी भी बड़े मंच पर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भारतीय जड़ों वाले खिलाड़ी फीफा वर्ल्ड कप जैसे वैश्विक टूर्नामेंट में दिखाई दे सकते हैं।

भारत अब तक फीफा वर्ल्ड कप के मुख्य दौर में कोई मैच नहीं खेल पाया है। हालांकि 1950 विश्व कप के लिए भारत को स्थान मिला था, लेकिन टीम ने टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, कतर की टीम में ताहसिन मोहम्मद जमशिद का नाम शामिल है, जिनका संबंध केरल से बताया गया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया की टीम में निशान वेलुपिल्लै शामिल हैं, जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं।

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इसके अलावा न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह और डीआर कांगो के सैमुअल माउतुसामी जैसे खिलाड़ियों का भी भारतीय मूल से जुड़ाव बताया गया है। इन खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय फुटबॉल फैंस के लिए वर्ल्ड कप से जुड़ने की एक अलग वजह बन सकती है।

भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन राष्ट्रीय टीम अब भी फीफा वर्ल्ड कप के मंच तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में भारतीय मूल के खिलाड़ियों का अलग-अलग देशों की टीमों के साथ इस स्तर तक पहुंचना भारतीय फुटबॉल समुदाय के लिए अहम माना जा रहा है।

थरूर ने अपने लेख में भारतीय फुटबॉल की मौजूदा स्थिति पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने लिखा कि देश में कई फुटबॉलर अभी भी बेहतर अवसरों और स्थिर करियर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसी बीच भारतीय मूल के खिलाड़ियों का वैश्विक मंच पर दिखना इस बात का संकेत है कि भारतीय जड़ों वाला फुटबॉल टैलेंट दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पहचान बना रहा है।

टूर्नामेंट में भारतीय टीम नहीं होगी, लेकिन भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संभावित मौजूदगी भारतीय प्रशंसकों के लिए इस विश्व कप को खास बना सकती है।

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