उत्तराखंड में सात नए महाविद्यालय खोलने की तैयारी, रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों पर रहेगा जोर

उत्तराखंड के एक सरकारी महाविद्यालय परिसर का दृश्य

देहरादून। उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग सात नए महाविद्यालय खोलने की तैयारी कर रहा है। इन महाविद्यालयों में परंपरागत विषयों के साथ रोजगार से जुड़े और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि छात्र डिग्री के साथ कौशल आधारित शिक्षा से भी जुड़ सकें।

उच्च शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार नए महाविद्यालयों के जरिए प्रदेश के उन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधा मजबूत करने की तैयारी है, जहां विद्यार्थियों को कॉलेज स्तर की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों या दूरस्थ संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

ये महाविद्यालय हैं प्रस्तावित

सीएम घोषणा के अनुसार हरिद्वार जिले के भगवानपुर ब्लाक में शहीद राजा विजय सिंह महाविद्यालय, टिहरी में राजकीय महाविद्यालय भिलंगना और अल्मोड़ा में राजकीय डिग्री कॉलेज भनोली खोले जाने प्रस्तावित हैं। इसके अलावा पिथौरागढ़ के मूनाकोट, बागेश्वर के काफलीगैर, देहरादून के गढ़कैंट और पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में भी नए महाविद्यालय खोलने की तैयारी है।

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प्रदेश में उच्च शिक्षा को अब रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को महाविद्यालयों में शामिल करने की तैयारी है। इन पाठ्यक्रमों के जरिए छात्रों को ऐसे कौशल सिखाए जा सकेंगे, जिनका उपयोग नौकरी, स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों में किया जा सके।

नए महाविद्यालय खुलने से खासकर उन छात्र-छात्राओं को राहत मिल सकती है, जिन्हें अभी पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर जाना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों का खर्च कम होगा और छोटे शहरों व कस्बों में शैक्षिक माहौल भी मजबूत होगा।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि नए महाविद्यालयों के साथ शिक्षकों, भवनों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता भी जरूरी होगी। केवल संस्थान खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनमें गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों का प्रभावी संचालन भी अहम रहेगा।

राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार को युवाओं के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। अगर नए महाविद्यालयों में स्थानीय जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं के अनुसार पाठ्यक्रम शुरू किए जाते हैं, तो इससे प्रदेश के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

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