पौड़ी में गुलदार के हमले में महिला की मौत, ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जताया आक्रोश

पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा क्षेत्र में गुलदार के हमले में एक महिला की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों ने वन विभाग से हमलावर गुलदार को पकड़ने या शूट करने की मांग की है। अब विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है, पूरी जानकारी खबर में पढ़ें।
पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में दिखाई दिया गुलदार

पौड़ी गढ़वाल। पौड़ी गढ़वाल जिले के नैनीडांडा विकासखंड के बणासी तल्ली क्षेत्र में गुलदार के हमले में एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान सुशीला देवी के रूप में हुई है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए हमलावर गुलदार को पकड़ने या शूट करने की मांग की है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सुशीला देवी घास लेने गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोग डरे हुए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। इसके बावजूद समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। महिला की मौत के बाद लोगों का आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

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घटना से नाराज ग्रामीणों ने सल्ड महादेव क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, पिंजरा लगाने और हमलावर गुलदार की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की।

विरोध के दौरान कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गुलदार को पकड़ने या शूट करने की ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक लोगों में डर बना रहेगा। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए खेतों और जंगलों की ओर जाना मुश्किल हो गया है।

घटना के बाद वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने की बात सामने आई है। विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा उपाय करने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को उचित सहायता देने और गांवों में नियमित गश्त कराने की भी मांग की है।

पौड़ी के पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार की सक्रियता को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। जंगलों से लगे गांवों में लोग घास, लकड़ी और पशुओं के चारे के लिए बाहर जाते हैं। ऐसे में वन्यजीवों के हमलों का खतरा लगातार बना रहता है।

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