देहरादून, 7 जुलाई 2026। उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए परिवहन निगम के बेड़े में 50 मिनी बसें शामिल करने की तैयारी है। परिवहन निगम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इन बसों को पर्वतीय रूटों पर चलाया जाएगा, जहां बड़ी बसों के संचालन में अक्सर दिक्कत आती है।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने परिवहन निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर बस सेवाओं की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में नियमित और सुरक्षित बस संचालन पर जोर दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पहाड़ी मार्गों पर यात्रियों की जरूरत के अनुसार छोटी बसों का संचालन बढ़ाया जाए।
उत्तराखंड के कई पर्वतीय रूट संकरे, घुमावदार और कम यात्री संख्या वाले हैं। ऐसे मार्गों पर बड़ी बसें चलाना कई बार मुश्किल होता है। इसी वजह से मिनी बसों को पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना जा रहा है। इससे गांवों, कस्बों और जिला मुख्यालयों के बीच आवाजाही करने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सकती है।
UTC की आधिकारिक वेबसाइट पर भी UTC Mini सेवा के लोकार्पण का उल्लेख किया गया है। वेबसाइट के अनुसार, 7 जुलाई को UTC Mini सेवा को हरी झंडी दिखाई गई। इससे साफ है कि परिवहन निगम छोटी बसों के जरिए पहाड़ी और जरूरतमंद रूटों पर सेवा विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
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उत्तराखंड को केंद्र से 140 इलेक्ट्रिक बसें मिलने की बात भी कही गई है। इन बसों के आने से राज्य के सार्वजनिक परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन बसों को किन रूटों पर चलाया जाएगा, यह चार्जिंग सुविधा, रूट की स्थिति और संचालन योजना पर निर्भर करेगा।
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में सार्वजनिक परिवहन आम लोगों की बड़ी जरूरत है। दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवा सीमित होने से छात्रों, कर्मचारियों, मरीजों और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कई जगह लोगों को निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
नई मिनी बसों के संचालन से छोटे और कठिन रूटों पर परिवहन सुविधा बढ़ सकती है। इससे उन क्षेत्रों को भी राहत मिल सकती है, जहां यात्रियों की संख्या कम होने के कारण बड़ी बसों का संचालन नियमित नहीं हो पाता। छोटी बसें ऐसे रूटों पर लागत और संचालन दोनों लिहाज से बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।
हालांकि, नई बसों के साथ निगम के सामने नियमित संचालन, चालक-कंडक्टर की उपलब्धता, रखरखाव और घाटे वाले रूटों पर सेवा बनाए रखने जैसी चुनौतियां भी रहेंगी। पहाड़ी मार्गों पर बस सेवा तभी प्रभावी होगी, जब बसें तय समय पर और जरूरतमंद रूटों पर लगातार चलें।
अगर 50 मिनी बसों का संचालन योजना के अनुसार शुरू होता है, तो इसका सीधा लाभ पहाड़ी जिलों के यात्रियों को मिल सकता है। वहीं, 140 इलेक्ट्रिक बसों के आने से राज्य के परिवहन बेड़े में नई तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प जुड़ेंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन बसों को किन रूटों पर और कब से चलाया जाता है।
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