देहरादून, 7 जुलाई 2026। उत्तरकाशी जिले के हर्षिल क्षेत्र में कृत्रिम झील बनने के मामले पर आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ANI की ओर से साझा किए गए वीडियो में आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने झील की स्थिति और पानी की निकासी को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
सुमन ने कहा कि हर्षिल क्षेत्र में बनी कृत्रिम झील को लेकर विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। पानी की निकासी से जुड़े कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि पानी के दबाव या अचानक बहाव जैसी स्थिति में समय पर जरूरी कार्रवाई की जा सके।
हर्षिल उत्तरकाशी जिले का संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र है। मानसून के दौरान यहां तेज बारिश, भूस्खलन और मलबा आने जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे में किसी नदी या नाले के प्रवाह में रुकावट आने पर अस्थायी झील जैसी स्थिति बन सकती है।
आपदा प्रबंधन विभाग के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि झील में जमा पानी नियंत्रित तरीके से बाहर निकले। पहाड़ी इलाकों में अचानक पानी का दबाव बढ़ने से नीचे की ओर बसे क्षेत्रों और रास्तों पर जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और तकनीकी आकलन करता है।
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मौसम केंद्र देहरादून की चेतावनी के अनुसार, 7 जुलाई को उत्तरकाशी जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। राज्य के पर्वतीय जिलों में गरज-चमक और बारिश के तीव्र दौर को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी गई थी।
हर्षिल और आसपास के क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के लिए सतर्कता जरूरी हो गई है। विभाग की कोशिश है कि पानी का बहाव सामान्य रहे और किसी भी संभावित आपदा स्थिति से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें।
फिलहाल विभाग ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और पानी की निकासी से जुड़े प्रयास जारी रखने की बात कही है। लोगों से भी बारिश के दौरान नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास अनावश्यक रूप से न जाने की अपील की गई है।
हर्षिल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, देवदार के घने जंगलों, भागीरथी नदी और शांत पहाड़ी वातावरण के लिए जाना जाता है। गंगोत्री धाम मार्ग पर स्थित यह क्षेत्र पर्यटकों और यात्रियों के लिए खास आकर्षण रखता है।
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