उत्तराखंड में साइबर फ्रॉड रोकने को बनेगा स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, 1930 हेल्पलाइन और ई-जीरो FIR सिस्टम होगा मजबूत

साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट सबसे अहम माने जाते हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य शिकायत दर्ज करने से लेकर समन्वय और कार्रवाई की प्रक्रिया को तेज करना है। इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा और 1930 हेल्पलाइन की भूमिका कैसे मजबूत होगी, जानिए।
A person using a laptop displaying an e-Zero FIR cyber crime reporting portal, representing Uttarakhand's strengthened cyber crime response system with S4C and the 1930 helpline.

देहरादून, 14 जुलाई। उत्तराखंड में साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य स्तर पर नई व्यवस्था तैयार की जाएगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में गृह विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश में स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी S4C शीघ्र स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सेंटर को जल्द नोटिफाई करने को भी कहा।

बैठक में प्रदेश में साइबर अपराधों की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि S4C बनने से केंद्र, राज्य और जिलों के बीच समन्वय मजबूत होगा। इससे साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को जल्द राहत दिलाने और कार्रवाई को तेज करने में मदद मिल सकेगी।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों को मजबूत करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुलिस की तकनीकी क्षमता, संसाधन और प्रशिक्षण को लगातार बेहतर करना जरूरी है।

बैठक में 1930 साइबर हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने पर खास जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हेल्पलाइन का रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए 1930 कॉल सेंटर की मैनपावर बढ़ाई जाए। साइबर फ्रॉड में शुरुआती समय बेहद अहम होता है, क्योंकि तुरंत शिकायत दर्ज होने पर संदिग्ध लेनदेन रोकने और रकम वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है।

ई-जीरो FIR सिस्टम को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि ई-जीरो FIR को शत-प्रतिशत FIR में बदलने और इसे CCTNS से जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इससे शिकायतों को औपचारिक जांच प्रक्रिया में लाने और संबंधित थाने या एजेंसी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

बैठक में यह भी कहा गया कि साइबर फ्रॉड के बाद कई पीड़ित जानकारी के अभाव में समय पर शिकायत नहीं कर पाते। कई लोग मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का लाभ भी नहीं ले पाते। मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को ऐसे मामलों में सक्रिय होकर पीड़ितों की सहायता करने के निर्देश दिए।

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उन्होंने शिकायत निवारण मॉड्यूल और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के बारे में जनजागरूकता बढ़ाने को भी जरूरी बताया। इसके लिए मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए, ताकि लोग साइबर ठगी से बच सकें और ठगी होने पर तुरंत सही कदम उठा सकें।

मुख्य सचिव ने शिकायत निवारण मॉड्यूल पर मिलने वाली शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ साइबर कमांडो की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरूगेशन, आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह और अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट मौजूद रहीं।

राज्य में ऑनलाइन ठगी और डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह व्यवस्था पीड़ितों की शिकायत, समन्वय और त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। फिलहाल S4C को स्थापित और नोटिफाई करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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