देहरादून, 14 जुलाई। देहरादून एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए हब एंड स्पोक मॉडल पर प्रस्ताव फिर चर्चा में है। इस मॉडल के जरिए देहरादून से सीधे विदेश की उड़ान शुरू किए बिना भी यात्रियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने की सुविधा मिल सकती है।
हालांकि यह सुविधा अभी प्रस्ताव स्तर पर है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण यानी यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन के अनुसार, उनके पदभार संभालने से पहले इस तरह का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था। प्रस्ताव पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी लेने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस मॉडल के लागू होने का अर्थ देहरादून से सीधे विदेश के लिए विमान सेवा शुरू होना नहीं होगा। इसमें देहरादून छोटे ‘स्पोक एयरपोर्ट’ और दिल्ली जैसा बड़ा हवाई अड्डा ‘हब’ बन सकता है। यात्री दून से हब एयरपोर्ट तक पहली उड़ान लेंगे और वहां से उसी यात्रा के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ेंगे।
योजना मंजूर होने पर यात्रियों को देहरादून से यात्रा शुरू करते समय चेक-इन और सामान जमा करने जैसी शुरुआती प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा मिल सकती है। हब एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद उन्हें सामान दोबारा लेकर फिर से चेक-इन कराने की जरूरत कम हो सकती है। इमिग्रेशन जैसी प्रक्रिया किस स्तर पर और किस व्यवस्था के तहत पूरी होगी, यह मंजूरी और संचालन मॉडल तय होने के बाद स्पष्ट होगा।
देहरादून में इस तरह की सुविधा शुरू करने से पहले एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से जुड़ी जरूरी व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसमें इमिग्रेशन, सुरक्षा जांच, यात्रियों और सामान की अलग आवाजाही, एयरलाइन संचालन, केंद्रीय एजेंसियों की मंजूरी और कस्टम से जुड़ी प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के मौजूदा रिकॉर्ड में देहरादून एयरपोर्ट पर कस्टम और इमिग्रेशन सुविधा उपलब्ध नहीं है। एयरपोर्ट का रनवे 2,140 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है। फिलहाल यहां घरेलू उड़ानों का संचालन होता है।
देहरादून एयरपोर्ट को सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए विकसित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। सीधे विदेशी उड़ानों के लिए बड़े विमानों का संचालन, रनवे क्षमता और अन्य अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं का विकास लंबी प्रक्रिया हो सकती है। हब एंड स्पोक मॉडल में देहरादून से लंबी दूरी का बड़ा विमान उड़ाना जरूरी नहीं होगा, क्योंकि पहली उड़ान केवल दिल्ली जैसे भारतीय हब तक जाएगी।
यही कारण है कि इस मॉडल को रनवे विस्तार पूरा होने से पहले उत्तराखंड के यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ने के संभावित रास्ते के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि यह रनवे विस्तार या भविष्य में देहरादून से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विकल्प नहीं होगा। दोनों व्यवस्थाएं अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ सकती हैं।
देश में इस मॉडल के तहत Air India ने 25 जून 2026 से वाराणसी से Easy Connect उड़ान शुरू की। इस व्यवस्था में यात्री वाराणसी में सामान जमा कर और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी कर दिल्ली पहुंचते हैं। वहां से वे अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट व्यवस्था के तहत आगे की उड़ान पकड़ते हैं।
देहरादून में भी यदि ऐसा मॉडल लागू होता है तो शुरुआती लाभ मुख्य रूप से उत्तराखंड से विदेश जाने वाले यात्रियों को मिल सकता है। विदेश से देहरादून लौटने वाले यात्रियों के लिए यही प्रक्रिया किस तरह लागू होगी, यह प्रस्ताव की शर्तें और स्वीकृत संचालन व्यवस्था सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।
इस व्यवस्था से नौकरी, पढ़ाई, कारोबार, पर्यटन या पारिवारिक कारणों से विदेश जाने वाले यात्रियों को दिल्ली जैसे बड़े एयरपोर्ट पर दोबारा पूरी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम हो सकती है। देहरादून से ही यात्रा शुरू होने के कारण सामान संभालने और ट्रांजिट से जुड़ी जटिलता भी घट सकती है।
फिलहाल प्रस्ताव को मंजूरी मिलने, देहरादून के लिए हब एयरपोर्ट और एयरलाइन तय होने तथा सुविधा शुरू होने की कोई समयसीमा घोषित नहीं हुई है। यूकाडा द्वारा प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही पता चलेगा कि उत्तराखंड के यात्रियों के लिए यह व्यवस्था कब तक शुरू हो सकती है।
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