उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन परियोजना पर अप्रैल 2026 तक ₹28,286.15 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की अप्रैल माह की मासिक परियोजना निगरानी फ्लैश रिपोर्ट में सामने आई है।
करीब 125 किलोमीटर लंबी यह ब्रॉड गेज रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे निर्माण परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशील भू-भाग के कारण इस परियोजना में बड़े पैमाने पर टनल, पुल और पहाड़ी इंजीनियरिंग कार्य शामिल हैं। परियोजना की कुल लागत ₹38,953 करोड़ आंकी गई है।
इस रेल कॉरिडोर का उद्देश्य गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र को हर मौसम में रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही यह परियोजना सीमा क्षेत्रों तक पहुंच को मजबूत करने और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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परियोजना के तहत 104 किलोमीटर लंबाई की 16 मुख्य रेल सुरंगों और करीब 98 किलोमीटर लंबाई की 12 एस्केप टनल का निर्माण किया जाना है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, अब तक 99 किलोमीटर लंबाई की मुख्य सुरंगों और 94 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 9 एस्केप टनल का काम पूरा किया जा चुका है।
रेल विकास निगम लिमिटेड इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी है। आरवीएनएल के अनुसार, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख शहरों तक सीधी रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी और चारधाम यात्रा सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही उत्तराखंड के रणनीतिक रूप से अहम इलाकों तक यातायात और आपूर्ति व्यवस्था भी मजबूत होगी।
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