देहरादून, 23 जून। उत्तराखंड में वन विभाग और वन विकास निगम से जुड़े दैनिक श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। 10 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके दैनिक श्रमिकों को अब प्रतिमाह न्यूनतम वेतनमान के समतुल्य 18,000 रुपये मानदेय मिलेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद वन मुख्यालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार, इस श्रेणी में अभी 589 दैनिक श्रमिक चिह्नित किए गए हैं। इससे पहले वन विभाग और वन विकास निगम में 304 श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का लाभ मिल रहा था। कुल 893 दैनिक श्रमिकों में से शेष पात्र श्रमिक लंबे समय से न्यूनतम मानदेय की उम्मीद कर रहे थे।
सरकार ने फरवरी 2026 में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से जुड़े इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद अब विभागीय आदेश जारी होने से पात्र श्रमिकों को इसका लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है, जो वर्षों से विभागीय कार्यों में दैनिक श्रमिक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
हालांकि यह लाभ सभी दैनिक श्रमिकों को स्वतः नहीं मिलेगा। इसके लिए 10 साल की निरंतर सेवा की शर्त रखी गई है। विभागीय स्तर पर पात्र कर्मचारियों की पहचान के बाद ही मानदेय भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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वन विभाग में दैनिक श्रमिकों की भूमिका मैदानी स्तर पर काफी महत्वपूर्ण रहती है। जंगलों की सुरक्षा, गश्त, पौधरोपण, नर्सरी कार्य, वन चौकियों से जुड़े काम और वनाग्नि नियंत्रण जैसे कार्यों में ये कर्मचारी विभाग की पहली पंक्ति में काम करते हैं। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में इनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
इस निर्णय से दैनिक श्रमिकों की आय में स्थिरता आने की उम्मीद है। लंबे समय से कम मानदेय पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए 18,000 रुपये प्रतिमाह की व्यवस्था आर्थिक राहत के रूप में देखी जा रही है।
फिलहाल आदेश जारी होने के बाद अब विभागीय स्तर पर पात्र श्रमिकों का सत्यापन और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे वन विभाग और वन विकास निगम में लंबे समय से सेवाएं दे रहे दैनिक श्रमिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
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