हरिद्वार में नकली नोटों का अंतरराज्यीय नेटवर्क पकड़ा गया, पंजाब से दो आरोपी गिरफ्तार; ₹1.10 लाख बरामद

हरिद्वार में पहले हुई गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच पंजाब तक पहुंची, जहां से कथित नेटवर्क से जुड़े दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसियां नकली नोटों की आपूर्ति, वितरण तंत्र और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। जानिए पूरा मामला।
Haridwar Police personnel with arrested suspects and seized counterfeit currency printing equipment during an interstate fake currency investigation.

हरिद्वार, 13 जुलाई। हरिद्वार पुलिस ने नकली नोटों के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए पंजाब से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से ₹1.10 लाख के नकली नोट, जाली मुद्रा छापने में इस्तेमाल किया गया प्रिंटर और एक कार बरामद की गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब के गुरदासपुर निवासी पवन कुमार और अमृतसर निवासी सुखबीर सिंह के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि दोनों अलग-अलग व्यवसायों की आड़ में नकली नोटों की आपूर्ति से जुड़े थे। जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से ₹50 हजार की असली रकम के बदले ₹1 लाख की नकली मुद्रा उपलब्ध कराई जाती थी।

इस मामले की कड़ी हरिद्वार में छह जुलाई को हुई चार गिरफ्तारियों से जुड़ी है। पुलिस ने उस समय सरजीत सिंह, टिंकू, सुमित कुमार और संजीव कुमार को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से ₹84,500 के नकली नोट बरामद किए थे।

इसके बाद पुलिस ने टिंकू और सुमित को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उनसे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम पंजाब पहुंची और पवन कुमार तथा सुखबीर सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि दोनों की भूमिका नकली नोटों की छपाई और आपूर्ति से जुड़ी मिली है।

जांच के दौरान पुलिस को एक प्रिंटर भी मिला, जिसका इस्तेमाल कथित रूप से जाली नोट तैयार करने में किया जाता था। इसके अलावा आरोपियों के पास से एक कार बरामद की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली मुद्रा कहां-कहां पहुंचाई गई और नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

पुलिस के अनुसार, सुखबीर सिंह पहले भी बैंक धोखाधड़ी और नकली मुद्रा से जुड़े मामलों में जेल जा चुका है। वहीं, पवन कुमार के खिलाफ मादक पदार्थ कानून के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का दावा है कि दोनों की मुलाकात जेल में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने कथित रूप से नकली नोटों का नेटवर्क तैयार किया।

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में नकली नोटों की सप्लाई स्थानीय बाजार, छोटे व्यापारियों और यात्रियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती है। पुलिस अब आरोपियों के पुराने लेन-देन, संपर्कों और संभावित वितरण तंत्र की जांच कर रही है।

मामले में लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।

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