केदारनाथ पैदल मार्ग से मलबा हटने के बाद यात्रा फिर शुरू, पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू

मार्ग खुलने से श्रद्धालुओं की यात्रा दोबारा शुरू हो गई है, लेकिन मानसून के बीच भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और मार्ग की सुरक्षा का आकलन होने तक घोड़ा-खच्चर सेवाएं बंद रखी गई हैं, इसलिए यात्रियों को यात्रा से पहले ताजा स्थिति की जानकारी लेना जरूरी होगा।
Rescue personnel and officials assist pilgrims along a landslide-affected section of the Kedarnath foot route during monsoon conditions.

रुद्रप्रयाग, 18 जुलाई। केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर मलबा और बड़े पत्थर आने के बाद रोकी गई पैदल यात्रा शनिवार को दोबारा शुरू कर दी गई। मार्ग से अधिकांश मलबा हटाए जाने के बाद प्रशासन ने पैदल श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी है। हालांकि सुरक्षा को देखते हुए घोड़ा-खच्चर संचालन फिलहाल शुरू नहीं किया गया है।

ANI के अनुसार 17 जुलाई की शाम और रात को गौरीकुंड गेट क्षेत्र, गौरीकुंड से चीरबासा के बीच और चीरबासा के आसपास कई स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और पत्थर पैदल मार्ग पर आ गए थे। इसके बाद यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई।

शनिवार सुबह जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग की आपदा प्रतिक्रिया इकाई और अन्य संबंधित विभागों की टीमों ने मार्ग से मलबा हटाने का काम शुरू किया। अधिकांश स्थानों पर रास्ता साफ होने के बाद पैदल यात्रियों की आवाजाही बहाल कर दी गई।

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के अनुसार मार्ग के ज्यादातर हिस्सों से मलबा हटा दिया गया है। चीरबासा क्षेत्र में कुछ बड़े पत्थरों को हटाने का काम जारी था। प्रशासन ने संबंधित विभागों को मार्ग की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

पैदल यात्रा शुरू होने के बावजूद घोड़ा-खच्चर सेवाओं को तत्काल बहाल नहीं किया गया। प्रशासन का कहना है कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही इनका संचालन शुरू किया जाएगा।

मानसून के दौरान केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन, मलबा आने और पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। यात्रियों से मौसम और मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

यात्रा मार्ग पर तैनात पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को भी संवेदनशील स्थानों पर सतर्क रहने को कहा गया है। मौसम खराब होने या दोबारा मलबा आने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने और चरणबद्ध तरीके से आगे भेजने की व्यवस्था की गई है।

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