उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं में गिनी जाने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा को हिमालय की “महाकुंभ यात्रा” भी कहा जाता है। यह ऐतिहासिक यात्रा हर 12 साल में आयोजित होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और यात्री ऊंचे हिमालयी मार्गों से होकर मां नंदा को विदाई देने निकलते हैं।
अब वर्ष 2027 में प्रस्तावित राजजात यात्रा से पहले रूपकुंड और बेदनी बुग्याल जाने वाले यात्रियों और ट्रेकर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
बदरीनाथ वन प्रभाग ने राजजात मार्ग से जुड़े 4 प्रमुख ट्रैक रूटों की मरम्मत और सुधार की तैयारी शुरू कर दी है। इन मार्गों को सुधारने पर करीब ₹1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
वन विभाग के अनुसार, कुल करीब 48 Km लंबे पैदल मार्ग को दुरुस्त किया जाएगा, जिससे यात्रा मार्ग पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम बन सके।
सबसे ज्यादा राहत उन ट्रेकर्स और श्रद्धालुओं को मिलेगी, जो वाण, गैरोली पातल, पातर नचौनिया, बेदनी बुग्याल और रूपकुंड की ओर जाते हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, इन ट्रैक रूट्स के सुधरने से रूपकुंड और नंदा देवी राजजात मार्ग पर ट्रेकिंग पहले से ज्यादा आसान हो सकती है। साथ ही स्थानीय लोगों की ऊंचाई वाले बुग्यालों और चारागाहों तक पहुंच भी बेहतर होगी।
पूर्वी पिंडर रेंज, देवाल में वाण से गैरोली पातल तक 10 Km लंबे मार्ग की मरम्मत पर ₹23.11 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसी रेंज में गैरोली पातल से पातर नचौनिया तक 12 Km ट्रैक को ₹34.40 लाख रुपये से सुधारा जाएगा। पातर नचौनिया लगभग 3,950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
नंदप्रयाग रेंज में सुतोल से चंदनियाघाट तक 18 Km लंबे ट्रैक रूट पर सबसे अधिक ₹50.57 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
वहीं मध्य पिंडर रेंज, थराली में डुंग्री से सूना तक 8 Km लंबे मार्ग की मरम्मत ₹13.57 लाख रुपये से की जाएगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, देवाल, थराली और नंदप्रयाग क्षेत्र के आरक्षित वन क्षेत्रों में इन पैदल मार्गों की मरम्मत को अगले 3 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि इन मार्गों के सुधरने से केवल राजजात यात्रा ही नहीं, बल्कि हर साल यहां आने वाले हजारों ट्रेकर्स और स्थानीय लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
रूपकुंड और बेदनी बुग्याल उत्तराखंड के सबसे चर्चित उच्च हिमालयी ट्रेक क्षेत्रों में शामिल हैं। ऐसे में इन रास्तों की मरम्मत को आने वाली राजजात यात्रा की बड़ी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
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