उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में ओम पर्वत क्षेत्र के निकट शिवलिंग और नंदी की स्थापना को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय रंग समुदाय और रंग कल्याण संस्था की आपत्ति के बाद प्रशासन ने फिलहाल प्रस्तावित स्थापना कार्यक्रम पर रोक लगा दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्य करने वाले एक ट्रस्ट ने ओम पर्वत के सामने लगभग तीन टन वजनी शिवलिंग और नंदी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए मूर्तियां धारचूला से आगे गर्बाधार क्षेत्र तक पहुंचाई गई थीं।
हालांकि, व्यांस घाटी में रहने वाले रंग समुदाय ने इस पर आपत्ति जताई। समुदाय का कहना है कि उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं प्रकृति पूजा पर आधारित हैं तथा वे अपनी भूमि पर किसी नई कृत्रिम धार्मिक संरचना की स्थापना की अनुमति नहीं देते।
रंग कल्याण संस्था के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित स्थापना से पहले स्थानीय ग्राम सभा और समुदाय से आवश्यक सहमति नहीं ली गई। इसके बाद संस्था ने प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
धारचूला के उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि संबंधित पक्षों के बीच सहमति न बनने और स्थानीय स्तर पर अनुमति न होने के कारण वाहन को वापस धारचूला बुला लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा और स्थानीय समुदाय की सहमति के बिना प्रशासन किसी भी प्रकार की स्थापना की अनुमति नहीं दे सकता।
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ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि उनका उद्देश्य क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देना था और इस संबंध में स्थानीय लोगों से बातचीत जारी है। हालांकि स्थानीय समुदाय ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी पारंपरिक मान्यताओं के विपरीत किसी भी कृत्रिम संरचना की स्थापना का समर्थन नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि व्यांस घाटी, दारमा घाटी और चौदांस घाटी में रहने वाला रंग समुदाय उत्तराखंड के प्रमुख आदिवासी समुदायों में शामिल है। यह समुदाय अपनी प्रकृति आधारित सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। ओम पर्वत और आदि कैलाश क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों का संचालन भी लंबे समय से स्थानीय परंपराओं और समुदाय की भागीदारी के साथ होता रहा है।
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