रामनगर, 14 जुलाई। “पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया” का नारा हर किसी ने सुना है, लेकिन नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र के चुकुम गांव से सामने आया वीडियो पहाड़ के दूरस्थ इलाकों की मुश्किल हकीकत दिखाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बच्चे कोसी नदी के तेज बहाव के बीच जोखिम उठाकर आवाजाही करते दिखाई दे रहे हैं। दावा है कि स्थायी पुल नहीं होने से बच्चों को स्कूल जाने के लिए बरसात में इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है।
चुकुम गांव कोसी नदी के किनारे बसा है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कोसी के उफान के दौरान गांव का संपर्क रामनगर से प्रभावित हो जाता है और यह इलाका कई बार टापू जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। गांव में करीब 100 परिवार और लगभग 500 लोग रहते हैं। बरसात में नदी का बहाव बढ़ने पर स्कूल, बाजार, अस्पताल और जरूरी सेवाओं तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, हर साल कोसी नदी पर अस्थायी लकड़ी का पुल बनाया जाता है, जो गांव को रामनगर से जोड़ने वाली लाइफलाइन की तरह काम करता है। स्कूल जाने वाले बच्चे भी इसी अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। बारिश के दौरान यह रास्ता और जोखिमभरा हो जाता है, क्योंकि पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी और सुरक्षित संपर्क मार्ग नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से बाहर जाने वाले लोगों को होती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवाजाही रुकने या बेहद जोखिमभरी हो जाने की स्थिति बनती है।
वीडियो में बच्चे पानी के बीच रास्ता पार करते दिखते हैं। ऐसी स्थिति में एक छोटी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव के लिए सुरक्षित संपर्क मार्ग और स्थायी पुल की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में न डालनी पड़े।
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स्थानीय रिपोर्ट में प्रशासनिक तैयारी का भी उल्लेख है। इसके अनुसार, मानसून से पहले गांव में तीन महीने का राशन उपलब्ध कराया गया, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था की गई और आपात स्थिति में आवाजाही के लिए राफ्ट रखी गई है। हालांकि, ग्रामीणों की मूल मांग स्थायी और सुरक्षित संपर्क व्यवस्था की है।
चुकुम की समस्या केवल एक गांव की परेशानी नहीं है। पहाड़ के कई दूरस्थ क्षेत्रों में बरसात के दौरान सड़क, पुल और सुरक्षित रास्ते अब भी बड़ी जरूरत बने हुए हैं। अस्थायी पुल या राफ्ट जैसी व्यवस्थाएं तात्कालिक राहत दे सकती हैं, लेकिन बच्चों की शिक्षा, मरीजों की आवाजाही और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए स्थायी समाधान जरूरी है।
ग्रामीणों की हिम्मत और मजबूरी दोनों इस मामले में साफ दिखती हैं। किसी भी गांव के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए उफनती नदी या अस्थायी पुल पर निर्भर नहीं होना चाहिए। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों पर आधारित है। संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से स्थायी पुल, वैकल्पिक मार्ग या निर्माण योजना पर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी आने के बाद स्थिति और साफ होगी।
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