ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा, जून 2028 तक ब्यासी तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा होने का दावा किया गया है। सुरंगों, पुलों और रेल लाइन निर्माण की प्रगति के बीच ब्यासी तक ट्रेन संचालन कब शुरू हो सकता है और आगे की योजना क्या है, जानिए।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत निर्मित रेलवे सुरंग का आंतरिक दृश्य

देहरादून, 21 जून। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। आरवीएनएल अधिकारियों के अनुसार, परियोजना में अब तक 22 सुरंगों और 8 बड़े पुलों का काम पूरा हो चुका है। पहले चरण में जून 2028 तक ब्यासी तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद दिसंबर 2029 तक रेल सेवा को कर्णप्रयाग तक पहुंचाने की योजना है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना करीब 125 किलोमीटर लंबी है। इस परियोजना के तहत 12 रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। रेल लाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा, जिससे गढ़वाल क्षेत्र में रेल संपर्क मजबूत होगा और यात्रियों को आवाजाही का नया विकल्प मिलेगा।

आरवीएनएल अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना में मुख्य और एस्केप टनल को मिलाकर कुल करीब 213 किलोमीटर टनलिंग कार्य किया जाना है। इसमें से करीब 206 किलोमीटर सुरंग खुदाई पूरी हो चुकी है। वहीं, 150 किलोमीटर से अधिक हिस्से में लाइनिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है।

परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में ब्यासी तक रेल संचालन शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए जून 2028 तक का लक्ष्य तय किया गया है। इसके बाद अगले चरण में दिसंबर 2029 तक कर्णप्रयाग तक रेल सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

हिमालयी क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। अधिकारियों के अनुसार, टनल नंबर एक, पांच और 14 में कठिन भूगर्भीय हालात के कारण काम अपेक्षाकृत धीमा हुआ है। इन सुरंगों में ब्रेकथ्रू का काम मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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देवप्रयाग और जनासू के बीच बनी टनल-8 परियोजना की अहम उपलब्धियों में शामिल है। करीब 14.58 किलोमीटर लंबी यह सुरंग परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक मानी जा रही है। इसके पूरा होने से रेल परियोजना के बड़े हिस्से में निर्माण कार्य को गति मिली है।

आरवीएनएल अधिकारियों ने समिति को परियोजना की प्रगति और निर्माण कार्यों की स्थिति की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सुरंगों, पुलों, लाइनिंग और स्टेशन निर्माण से जुड़े काम अलग-अलग पैकेजों में किए जा रहे हैं।

परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। इससे बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। साथ ही स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

गढ़वाल क्षेत्र के लिए यह रेल परियोजना कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। अभी पहाड़ी जिलों तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग पर अधिक निर्भरता है। रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को सुरक्षित और तेज आवागमन का एक नया विकल्प मिल सकेगा।

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