बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण: गिरफ्तारी के बाद प्रमोद नौटियाल की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

थाली भेंट की गणना में कथित अनियमितता से शुरू हुआ मामला अब विभागीय जांच, गिरफ्तारी और एसआईटी की विस्तृत पड़ताल तक पहुंच चुका है। अदालत ने किस आधार पर राहत नहीं दी और जांच में आगे क्या सामने आया, पढ़िए।
A composite editorial image showing Pramod Nautiyal after his arrest, Badrinath Temple, and police personnel during the investigation into the alleged offering irregularity case.

नैनीताल, 17 जुलाई। बदरीनाथ मंदिर में थाली भेंट की गणना के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की याचिका उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पुलिस नौटियाल को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

नौटियाल ने अपने निलंबन आदेश और पुलिस में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के साथ गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी। गिरफ्तारी हो जाने के कारण उस पर रोक से जुड़ी राहत का औचित्य समाप्त हो गया। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट का यह आदेश नौटियाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं है। कथित वित्तीय अनियमितता की पुलिस और एसआईटी जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

मामला 2 जुलाई 2026 को सामने आया था। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना मिली कि बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की थाली भेंट की गणना के दौरान कथित गड़बड़ी हुई है। इसके बाद मंदिर समिति के स्तर पर विभागीय जांच समिति गठित की गई।

प्रारंभिक जांच में मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की भूमिका पर सवाल उठे। आरोप है कि भेंट गणना के दौरान उन्होंने गणना स्थल से कथित रूप से धनराशि या सामग्री उठाई थी। प्रारंभिक निष्कर्षों के बाद मंदिर समिति ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

इसके बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान ने बदरीनाथ कोतवाली में लिखित तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में एसआईटी ने प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार किया।

मामले की जांच केवल नौटियाल की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। एसआईटी ने भेंट गणना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, अभिलेख और संबंधित कर्मचारियों की गतिविधियों की पड़ताल की है। उपलब्ध विवरण के अनुसार 22, 25 और 29 जून तथा 2 जुलाई की फुटेज जांच के दायरे में ली गई है।

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कुछ फुटेज में अन्य लोगों की गतिविधियां भी जांच एजेंसी के संज्ञान में आई हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितता किसी एक कर्मचारी तक सीमित थी या इसमें अन्य लोगों की भी कोई भूमिका रही। अभी किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

मंदिर समिति की चार सदस्यीय जांच टीम ने इस प्रकरण पर 18 पन्नों की रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी है। रिपोर्ट में घटनाक्रम के साथ भेंट गणना की मौजूदा व्यवस्था और निगरानी से जुड़ी कमियों पर भी ध्यान दिलाया गया है।

भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए गणना में शामिल कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड, गणना स्थल पर अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने जैसे सुझाव दिए गए हैं। प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने और स्वतंत्र निगरानी बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया है।

जांच के दौरान चढ़ावे से जुड़े रजिस्टर में कथित ओवरराइटिंग का मामला भी सामने आया। इसके बाद मंदिर समिति ने कोषाध्यक्ष के स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किया। हालांकि, यह कार्रवाई अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है और इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

प्रकरण ने बदरीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चढ़ावे की गणना, अभिलेखों के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर व्यापक सवाल खड़े किए हैं। अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह तय करना होगा कि कथित गड़बड़ी कैसे हुई, उसमें किन लोगों की भूमिका रही और भविष्य में गणना प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाने के लिए कौन-से उपाय लागू किए जाते हैं।

फिलहाल प्रमोद नौटियाल के खिलाफ दर्ज मुकदमे में एसआईटी की जांच जारी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी उनकी मांग समाप्त हो गई है, लेकिन मूल आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

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