रैबार

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत निर्मित रेलवे सुरंग का आंतरिक दृश्य

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट: देश की सबसे लंबी रेल सुरंग 90% से ज्यादा बनकर तैयार, जनवरी से बिछेगा ट्रैक

गढ़वाल के लिए यह परियोजना सिर्फ एक नई परिवहन लाइन नहीं होगी, बल्कि सड़क पर निर्भरता के बीच एक अतिरिक्त रेल विकल्प तैयार करेगी। ऋषिकेश से आगे देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग तक पहुंच का यह बदलाव स्थानीय यात्रियों के साथ चारधाम से जुड़े क्षेत्रों के लिए भी मायने रखेगा। पूरी परियोजना में सुरंगों की हिस्सेदारी कितनी है और T-8 के बाद अगला बड़ा चरण क्या होगा, इसकी तस्वीर भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

Drone and sensor equipment monitoring a glacial lake in the high Himalayas of Uttarakhand

उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी हाईटेक, अब ड्रोन-सैटेलाइट और सेंसर से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

किसी झील में असामान्य बदलाव समय रहते पकड़ना प्रशासन के लिए संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्रवाई की गुंजाइश बढ़ा सकता है। इसके लिए तकनीकी एजेंसियों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी तंत्र और पहले से चल रहे पायलट प्रयास अहम होंगे। लेकिन यह निगरानी व्यवस्था जमीन पर चेतावनी और प्रतिक्रिया तक कितनी तेजी से पहुंचेगी, यही इसकी असली परीक्षा होगी।

Rafting boats waiting on the Ganga riverbank in Rishikesh during high water levels

ऋषिकेश में अभी राफ्टिंग के लिए करना होगा इंतजार, गंगा में बढ़ते जलस्तर के कारण 1 सितंबर से शुरू नहीं होगा संचालन

राफ्टिंग से जुड़े गाइड, कैंप, होटल और स्थानीय परिवहन कारोबार के लिए सीजन की शुरुआत का समय अहम है, वहीं यात्रियों के लिए भी बुकिंग से पहले संचालन की स्थिति जानना जरूरी होगा। आगे जानिए किन परिस्थितियों में रूटों को दोबारा अनुमति मिलेगी, पिछले सीजन में कितने पर्यटक पहुंचे थे और इस देरी का स्थानीय पर्यटन कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है।

Indian marathon runner holding the national flag alongside an Indian government official seated at a meeting

उत्तराखंड की भागीरथी बिष्ट ने हैदराबाद मैराथन में रचा इतिहास, 42.195 किमी दौड़ में जीता सिल्वर मेडल; तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने किया सम्मानित

वाण जैसे सीमांत पहाड़ी गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की मैराथन में लगातार शीर्ष स्थान हासिल करना भागीरथी की उपलब्धि को सिर्फ एक पदक से आगे ले जाता है। उनके हालिया प्रदर्शन और पिछले आयोजनों के रिकॉर्ड से लंबी दूरी की दौड़ में उनकी निरंतरता सामने आती है। यही प्रदर्शन चमोली के युवाओं और खेलों में आगे बढ़ने वाली बेटियों के लिए इस कहानी को खास बनाता है।

Trekkers walking through a Himalayan bugyal in Uttarakhand

उत्तराखंड का ड्याली सेरा ट्रेक बना ‘ट्रेक ऑफ द ईयर 2026’, पहले 300 ट्रेकर्स को मिलेगा सब्सिडी का लाभ

शुरुआती 300 यात्रियों के लिए आर्थिक राहत के साथ यह पहल जोशीमठ क्षेत्र के स्थानीय गाइड, पोर्टर और होमस्टे कारोबार के लिए भी नई मांग पैदा कर सकती है। लेकिन किसी नए ट्रेक को लंबे समय तक टिकाऊ विकल्प बनाने के लिए सिर्फ यात्रियों की संख्या नहीं, बल्कि रास्ते, पानी और कैंपिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी अहम होगी। इस बदलाव से चमोली के ट्रेकिंग पर्यटन में क्या नया जुड़ सकता है, पूरी तस्वीर खबर में जानिए।

Indian smartphone user checking Android security settings to protect against cyber fraud

मोबाइल में अभी चालू करें ये खास सेटिंग, साइबर ठगी से बचाने में करेगी मदद; जानिए एक्टिव करने का तरीका

संदिग्ध APK फाइलों और फर्जी वेबसाइटों के जरिए बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और OTP जैसी संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है। Device Protection और Google Play Protect जैसी सुविधाएं ऐसे डिजिटल जोखिमों से बचाव में मदद कर सकती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल करते समय यूजर को यह भी समझना जरूरी है कि सेटिंग कहां मिलेगी और किन परिस्थितियों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

Municipal wet organic waste being processed at a biogas facility in an urban Uttarakhand setting

उत्तराखंड के शहरों में रोज निकलता है 702 टन गीला कचरा, निस्तारण का दबाव घटाने के लिए क्या है सरकार की योजना?

नगर निकाय क्षेत्रों में रोजाना निकलने वाले कुल ठोस कचरे में करीब 702 टन गीला कचरा है, जिसे दूर की लैंडफिल साइटों तक पहुंचाने की जरूरत घटाने की कोशिश की जा रही है। देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में उपलब्ध जैविक कचरे की मात्रा इस व्यवस्था के लिए अहम हो सकती है। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में कचरे की उपलब्धता और परिवहन की व्यवहारिकता के बीच संतुलन योजना की बड़ी चुनौती रहेगी।

Himalayan lakes and high-altitude water bodies in Uttarakhand

उत्तराखंड में किन क्षेत्रों को ग्लेशियर झीलों से खतरा, 13 झीलें चिह्नित; सरकार बढ़ाएगी निगरानी और अर्ली वार्निंग

ऊंचाई वाले जलस्रोतों में बदलाव की स्थिति में नीचे की घाटियों तक असर पहुंच सकता है, इसलिए अब सिर्फ झीलों की पहचान पर्याप्त नहीं होगी। सरकार का अगला फोकस यह तय करने पर है कि संभावित घटना की स्थिति में किन इलाकों को पहले चेतावनी मिले, निकासी कैसे हो और स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया कितनी जल्दी दी जा सके। चिह्नित झीलों में अब तक क्या सर्वे हुआ है और किन क्षेत्रों में अगला अध्ययन प्रस्तावित है, इसकी पूरी जानकारी आगे देखें।

Sister tying a traditional Rakhi on her brother's wrist during Raksha Bandhan

27 साल बाद भद्रा रहित रक्षाबंधन का दावा, पांच शुभ योग भी बनेंगे; जानें राखी बांधने का सही समय

भाई-बहन के इस पर्व पर इस बार समय को लेकर सबसे अहम सवाल यह है कि सुबह राखी बांधने वालों के लिए कौन-सा समय उपयुक्त रहेगा और अलग-अलग स्थानों पर इसमें कितना अंतर हो सकता है। साथ ही, बताए गए शुभ योग और ग्रहण से जुड़ी स्थिति धार्मिक मान्यताओं में क्या मायने रखती है? पूरी जानकारी में पंचांग, स्थानीय समय और इस साल के विशेष संयोग को समझें।

Flood-affected Himalayan settlement with extensive mud and debris covering buildings and roads

नेपाल की बाढ़ में फंसे उत्तराखंड के लोगों से नहीं हो पा रहा संपर्क? सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

परिजनों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सूचना देते समय प्रभावित व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर और उपलब्ध स्थान की जानकारी साझा करें। इससे राज्य आपातकालीन तंत्र संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क और सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा।