देहरादून, 24 जून। लखनऊ के अलीगंज में व्यावसायिक इमारत में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तराखंड सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशभर में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, मॉल, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आम लोगों के उपयोग वाली इमारतों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में आग से बचाव और आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षित निकासी से जुड़े इंतजामों की गंभीरता से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि जन सुरक्षा सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है और फायर सेफ्टी मानकों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन संस्थानों में अग्निशमन व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, उनकी तुरंत पहचान की जाए और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जांच के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशील स्थिति, आपातकालीन निकास मार्ग, बिजली सुरक्षा व्यवस्था और आपदा की स्थिति में लोगों को तेजी से बाहर निकालने की तैयारी को विशेष रूप से परखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने फायर विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर ऑडिट प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिलों में संवेदनशील भवनों और अधिक भीड़ वाले परिसरों की प्राथमिकता के आधार पर जांच कराने को कहा है।
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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भी सभी सचिवों और जिलाधिकारियों को सरकारी व निजी प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर ऊंची इमारतों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, संकरी गलियों में बने परिसरों और कमजोर निकासी मार्गों वाली इमारतों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, होटल कारोबार, कोचिंग संस्थानों और बड़े व्यावसायिक परिसरों के बीच यह फैसला अहम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि फायर सेफ्टी ऑडिट केवल औपचारिकता नहीं रहेगा, बल्कि जहां कमियां मिलेंगी, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी की जाएगी।
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में भीषण आग लग गई थी। इस भवन में कोचिंग और प्रशिक्षण केंद्र सहित कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दिए और शुरुआती स्तर पर फायर सेफ्टी व भवन मानकों की अनदेखी को लेकर भी सवाल उठे।
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